वजन घटाने में सहायक 15 महत्त्वपूर्ण नियम और उपयोगी बातें

भोजन करने के आदर्श नियम भोजन करने का आयुर्वैदिक तरीका बहुत महत्त्वपूर्ण है। भोजन गरम तथा ताजा होना चाहिए। भोजन करने के तरीके से आपका स्वास्थ्य प्रभावित होता है। वजन घटाने के लिए सबसे पहले आपको अपने भोजन करने का समय पर ध्यान देना जरुरी है। यह लार तथा गैस्ट्रिक रसों के द्वारा मस्तिष्क और शरीर को संकेत भेजता है। भोजन का अंतिम परिणाम ओजस है। गंध, दृष्टि, स्पर्श तथा श्रवण उच्च स्तर पर संकेत भेजते हैं। भोजन करते समय व्यक्ति को शांत तथा तनाव रहित होना चाहिए।

वजन घटाने में महत्त्वपूर्ण नियम

अधिक वजनवाले या मोटापे से पीडित व्यक्ति को इन महत्त्वपूर्ण नियमों/बातों का पालन करना चाहिए:

1. भूख लगने पर ही खाएँ। समय पर भोजन करें।
2. लापरवाही से और जबरदस्ती न खाएँ।
3. नियमित अंतरालों पर खाएँ।
4. हो सके तो पद्मासन में बैठकर भोजन करें।
5. शांत वातावरण में भोजन करें।
6. दोपहर के भोजन तथा रात के भोजन के बीच कुछ नहीं लेना चाहिए।
7. अच्छी और स्वादु चीज के लालच में पेट को अत्यधिक न भरें।
8. अपनी इंद्रियों-गंध तथा स्वाद के दबाव में न खाएँ।
9. धीरे-धीरे तथा खूब चबाकर भोजन करें। मट्ठा के साथ 5 से 10 ग्राम की मात्रा में त्रिफला लें। चयापचय तथा हार्मोन संबंधी विकारों की स्थिति में चिकित्सक से संपर्क करें।
भोजन स्वच्छ एवं शांत वातावरण में किया जाना चाहिए। चिड़चिड़ाहट तथा क्रोध की अवस्था में भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पित्त को बढ़ाता है। इससे तनाव उत्पन्न होता है। तनाव गैस्ट्रिक अल्सर उत्पन्न कर सकता है। यह जानवरों पर प्रयोग द्वारा सिद्ध हो चुका है। अनियमित भोजन तथा उपवास के कारण ओजोक्षय, यानी ओजस का नाश होता है। अच्छा सात्त्विक आहार, शुद्ध शाकाहारी भोजन ओजस उत्पन्न करने के लिए सर्वोत्तम होता है ओजस विहीन खाद्य पदार्थ : अंडा, भारी और गरिष्ठ भोजन, तैलीय भोजन, मांस, चिकन, मछली, पनीर, अधिक नमक तथा खट्टा भोजन, बासी भोजन, डिब्बाबंद खाना, फ्रोजन खाद्य पदार्थ। रोज ध्यान करनेवालों को लहसुन, मशरुम तथा प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। फ्रिज में रखा गया भोजन ओजस उत्पन्न करने के लिए लाभदायक नहीं होगा। धूम्रपान, शराब, ब्राउन शुगर, पेथिडाइन आदि नशीली चीजों का सेवन कदापि नहीं करना चाहिए, यह ओजस के उत्पादन के लिए हानिकर होता है।

भोजन करने के नियम

भोजन की मेज पर किसी प्रकार की बाधा पाचन पर बुरा प्रभाव डालती है। इससे अच्छा पौष्टिक भोजन भी शरीर के लिए हानिकारक हो जाता है। अच्छे पोषण के लिए सात्त्विक आहार का सेवन करना चाहिए। भोजन से अधिकतम लाभ प्राप्तकरने के लिए नीचे 15 महत्त्वपूर्ण नियम दिए गए हैं। इन नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए:

1. बैठकर भोजन करें।

2. शांत वातावरण में भोजन करें।

3. भूख महसूस होने पर ही भोजन करें।

4. भोजन करते समय बातचीत न करें।

6. उचित समय पर ही भोजन करें।

8. भोजन छह स्वादवाला होना चाहिए।

10. भोजन अच्छी तरह पका हुआ होना चाहिए।

12. भोजन के साथ या भोजन के बाद हलका गरम पानी पीएँ।

13. भूख का केवल तीन-चौथाई ही खाएँ तथा जल्द पाचन के

लिए एक चौथाई पेट खाली रखें।

14. भोजन के बाद मट्ठा पीएँ।

15. भोजन के बाद कुछ देर के लिए बैठें, ताकि भोजन अच्छी तरह बैठ सके। जल्दबाजी, चिंता, चिड़चिड़ाहट तथा उत्तेजना पाचन को बाधित करते हैं। गरम पानी या हलका गरम पानी पाचन में मददगार होता है। दिन में दूध का और रात में दही का सेवन आयुर्वेद में वर्जित है।

 

 

 

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