Estrogen Harmone: 5 भोज्य पदार्थ जो एस्ट्रोजन हार्मोन के स्त्राव को नियंत्रित करते

कई पौधों में फायटोएस्ट्रोजन होता है जो संरचना में मनुष्य में पाए जानेवाले ओस्ट्रोजन हारमोन के सामान ही होता है मगर उसकी तुलना में कम शक्तिशाली होता है। पौधों में पाए जानेवाले मे हारमोन भले ही कम शक्तिशाली होते हैं मगर बाहरी दवाओं के सामान किसी तरह का अतिरिक्त घातक प्रभाव उत्पन्न नहीं करते अतः ये संश्लेषित हारमोन की तुलना में सुरक्षित होते हैं। और तो और कुछ भोजन जैसे पत्तागोभी परिवार की सब्ज़ियां शरीर में जनन तंत्र की गतिविधियों को बढ़ाती है जिसके कारण ओस्ट्रोजन का स्त्राव नियमित हो जाता है। चना कुल के पदार्थ, विशेषतः सोयाबीन ओएस्ट्रोजेनिक गतिविधियों को बढ़ाते हैं। अब ये गर्भनिरोधक गोलियों में प्रयुक्त होनेवाले यौगिकों का प्रमुख स्त्रोत बन गए हैं। शोधों के निष्कर्ष भी यह बताते हैं कि कम से कम 300 ऐसे पौधे हैं जिनमें से अधिकतर खाने लायक होते हैं, जिनके द्वारा ओएस्ट्रोजेनिक गतिविधियों की गति को बढ़ाने में मदद मिलती है। ये स्त्री हारमोन ओस्ट्रोजन को नियमित करते हैं।

भोज्य पदार्थ जो एस्ट्रोजन हार्मोन को नियमित करते हैं:

फलियां, पत्ता गोभी, कम वसावाले पदार्थ, मूंगफली, सोयाबीन और चोकर या गेहूं की भूसी

फलियां द्वारा एस्ट्रोजन हार्मोन- Estrogen Harmone

फलियां ओएस्ट्रोजेनिक गतिविधियों को बढ़ाती हैं। इनका सेवन महिलाओं को स्तन कैंसर के संक्रमण से बचा सकता है। ऐसा इसलिए होता है कि फलियों में फायटोएस्ट्रोजन होता है जो कैंसर पैदा करने वाले ओस्ट्रोजन की गतिविधि को रोक देता है। यह विचार अमेरिकन हेल्थ फाउन्डेशन के शोधकर्ता डॉ. लियोनार्ड ए. कोहेन, पीएचडी के द्वारा दिया गया। डॉ. कोहेन कहते हैं कैरिबियन और मैक्सिको क्षेत्रों में रहनेवाली हिस्पेनिक स्त्रियों को स्तन कैंसर अन्य अमेरिकन स्त्रियों की तुलना में कम होता है। अपने नए अध्ययन में इन्होंने इसका कारण भी खोज निकाला है। उनके अनुसार हिस्पेनिक स्त्रियां अमेरिकन स्त्रियों की तुलना में दुगनी मात्रा में फलियों का सेवन करती हैं। फलियां ओएस्ट्रोजेनिक गतिविधियों को बढ़ाती हैं। इनका सेवन महिलाओं को स्तन कैंसर के संक्रमण से बचा सकता है। हिस्पेनिक स्त्रियां एक सप्ताह में रोज 115 ग्राम फलियां खाती हैं जबकि अफ्रीकन अमेरिकन स्त्रियां इस मात्रा को सप्ताह में तीन बार और अमेरिकन स्त्रियां इसे सप्ताह में दो बार लेती हैं। डॉ. कोहेन के अनुसार फलियों में बहुत से कैंसररोधी यौगिक जैसे फायटेज और प्रोटीज इनहिबिटर्स भी होते हैं।

पत्तागोभी द्वारा एस्ट्रोजन हार्मोन

पत्तागोभी और इस कुल की अन्य सब्ज़ियों में ओएस्ट्रोजेनिक गतिविधियों के गुण पाए जाते हैं। ये शरीर के ओस्ट्रोजन की मात्रा का नियमन करती है अतः स्तन कैंसर से बचाव करती है। ये सब्ज़ियां चयापचय की गति को बढ़ाकर और हारमोन के विघटन की गति को तेज करके शरीर में ओस्ट्रोजन के स्त्राव को कम कर सकती हैं जिससे कैंसर की गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए हारमोन की बहुत कम मात्रा बची रहती है। इसे अध्याय 11 में विस्तार से समझाया गया है। कम वसा वाले भोज्य पदार्थ भोजन में ली जानेवाली वसा की मात्रा भी स्त्री और पुरुष हारमोंस के स्त्राव को नियंत्रित करती है। अधिक वसा का सेवन पुरुष हारमोंस के स्त्राव को अनियंत्रित करके उसके यौन जीवन को भी तबाह कर सकता हैं। महिलाओं द्वारा ली जानेवाली अधिक वसा की मात्रा भी ओस्ट्रोजन के स्त्राव को बढ़ाती है। भोजन में वसा की मात्रा कम करने से स्तन कैंसर और अन्य हारमोंस की अनियमितता से होनेवाले कैसर को नियंत्रित किया जा सकता है। शोधों के अध्ययन यह बताते हैं कि जिन महिलाओं ने रजो निवृत्ति से पहले या बाद में अपने आहार में वसा की मात्रा को 35–40 प्रतिशत से 20 प्रतिशत किया है, उनके रक्त में ओस्ट्रोजन की मात्रा कम हुई है।

मूंगफली द्वारा एस्ट्रोजन हार्मोन – Estrogen Harmone

मूंगफली जो बोरोन का प्रमुख स्त्रोत है, ओस्ट्रोजन की मात्रा को नियंत्रित करती है। बोरोन की अधिकता वाला भोजन लेने से रजोनिवृत्त हो चुकी महिलाओं के रक्त में ओस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है। इस तरह के आहार लेने से ओस्ट्रोजन के स्तर में उतनी ही वृद्धि होती है, जितनी ओस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ाने के लिए दी जाने वाली दवाओं से। इस बात की पुष्टि यू.एस. डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर द्वारा किए गए एक अध्ययन से हुई जिसे डॉ. फोरेस्ट निल्सन द्वारा किया गया। उनके अनुसार बोरोन रक्त में स्टीरायड की मात्रा बढ़ाता है। उन्होंने पता लगाया कि बोरोन की अधिकता वाला भोजन लेने वाली महिलाओं में ओस्ट्रोजन का सबसे सक्रिय रूप ओस्ट्राडिमोल 17 बी दुगुनी मात्रा में पाया जाता है। यह स्तर महिलाओं में कृत्रिम रूप से ओस्ट्रोजन प्रतिरोपण के बाद प्राप्त होने वाले स्तर के बराबर है।

 

सोयाबीन द्वारा एस्ट्रोजन हार्मोन

सोयाबीन भी ओस्ट्रोजन की गतिविधि बढ़ाने में लाभदायक है। इसमें कुछ ऐसे यौगिक होते हैं जो ओस्ट्रोजन की मात्रा का नियमन करते हैं। यह कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को भी रोकता है अतः स्तन कैंसर की आशंका को कम करता है। इसके बारे में इस पुस्तक के अध्याय 11 – कैंसर रोधी भोज्य पदार्थ में विस्तार से लिखा गया है। सोयाबीन में विशेष किस्म का पदार्थ लेसिथिन होता है, यह अन्य पदार्थों में उपस्थित लेसिथिन से भिन्न होता है। इस लेसिथिन में ओक्सिन नामक पादप हारमोन होता है जो ग्रंथि तंत्र को पोषित करता है और यौवन प्रदान करनेवाले हारमोंस के स्त्राव को उत्प्रेरित करता है।

गेहूं की भूसी द्वारा एस्ट्रोजन हार्मोन

गेहूं की भूसी भी ओस्ट्रोजन की गतिविधि को बढ़ाती है। यह रक्त में ओस्ट्रोजन का स्तर कम करती है अतः स्तन कैंसर की आशंका को कम करती है। अन्य अनाजों की भूसी जैसे जई या मक्के में ये गुण नहीं होते। इसका कारण यह है कि गेहूं की भूसी में उपस्थित रेशे घुलनशील होते हैं जिन्हें पचाने के लिए आंतों में उपस्थित जीवाणुओं को अधिक श्रम करना पड़ता है, इसके कारण कुछ जीव वैज्ञानिक गतिविधियां होती है जिससे रक्त में ओस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है। कुछ लोग यह मानते हैं कि गेहूं की भूसी ओस्ट्रोजन को खत्म कर देती है जिससे युवा महिलाओं के साथ ही रजो निवृत्त हुई महिलाओं में भी कैंसर की आशंका कम हो जाती है। एक शोध जिसे टट्स विश्वविद्यालय के औषधि विभाग द्वारा किया गया, यह बताता है कि ये रेशे कम वसा युक्त भोजन की तुलना में ओस्ट्रोजन के स्त्राव को अधिक नियंत्रित करते हैं। शोधकर्ता मार्गों वुड्स ने देखा कि वसा की मात्रा कम करना और रेशे अधिक मात्रा में लेना एक तरह के ओस्ट्रोजन जिसे ओस्ट्रो सल्फेट कहते हैं, को नियमित करता है। यह ओस्ट्रोजन स्तन कैंसर का प्रमुख कारण बनता है। जानवरों में कम वसा और अधिक रेशों युक्त आहार ने स्तन ट्यूमर की दर को लगभग आधा कर दिया। अन्य शोधों से भी पता चलता है कि ऐसी महिलाएं जिनके आहार में रेशों की मात्रा अधिक होती है, उनमें स्तन कैंसर की आशंका कम होती है।

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