Meditation Methods: ध्यान क्या है?, ध्यान कब करना चाहिए?

छोटा हो या बड़ा ध्यान कोई भी कर सकता है. कोई भी धर्म हो, कोई भी देश हो, हर कोई ध्यान कर सकता है. आज मनोविज्ञान ध्यान की प्राचीन पद्धतियों को अपना रहा है. ध्यान करने की कोई योग्यता नहीं है. ध्यान एक जरुरत है. हम तन को अच्छा करने के लिए बहुत कुछ करते है. हम भूल जाते है कि इस तन के साथ साथ हमारा एक मन भी है. जिसे अपने मन को दुरुस्त करना अपने मन को बलशाली करना हो उसे ध्यान करना चाहिए. इस लेख में ध्यान क्या है?, ध्यान करने का सही समय और उससे सम्बंधित(meditation in hindi) जानकारी प्रदान की गयी है।

ध्यान क्या है? – Meditation In Hindi

ध्यान एक घटना है. यह एक ऐसा अनुभव है जिसमें हम इन्द्रियातीत अवस्था में चले जाते है. एक ऐसी अवस्था जहाँ हम सुख और दुःख दोनों से परे चले जाते है. दुःख का डर मानव मन को हर वक़्त सताता रहता है और सुख की और भागना मानव मन की एक कल्पना मात्र है. लेकिन ध्यान हमें सुख और दुःख दोनों से परे लेकर जाता है. ध्यान होते समय न दुःख की चिंता रहती है और न ही सुख की. इसलिए निराशा के पलों में ध्यान का यदि प्रयोग किया जाये तो ध्यान निराशा से तुरंत निज़ात दिलाता है और मन को तुरंत आराम पहुचाता है.

ध्यान में क्या करना होता है? –

ध्यान में हमें अपने मन को एकाग्र करना होता है. एक तरह से मन को भागने से रोकना होता है. हमारा मन कभी भी किसी एक जगह टिकता नहीं है. मोटे तौर पर मन को टिकाना ही ध्यान है. मन जब एकाग्र होता है तो उसी समय मन ही शांत भी हो जाता है. यह शांति न दुःख होती है और न ही सुख. योग आसन ध्यान में सहायक होते है. लेकिन ध्यान आप बिना योग आसन सीखे भी कर सकते है. ध्यान की प्रक्रिया में सबसे जरुरी अंग होता है रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना. ध्यान आप जमीन पर बैठ कर भी कर सकते है और किसी अन्य जगह पर बैठ कर भी कर सकते है. ध्यान आप लेट कर भी कर सकते है. किसी आसन में ध्यान करना चाहिए जो आसन आपकेलिए आरामदायक हो उस आसन में आपको ध्यान करना चाहियें. लेकिन जब हम गहरे ध्यान के उतरने लगते है तो हमें शरीर की स्थिरता की आवश्यकता पड़ती है. उसके लिए हमें पद्मासन, अर्धपद्मासन जैसे आसन काम में आते है. मुख्य बात रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना होता है. क्या ध्यान में मन्त्र बोलने आवश्यक है मन्त्र भारत के प्राचीन ऋषियों द्वारा खोजी गयी प्रार्थनाएं है जिन्हें अक्सर ध्यान शुरू करने से पहले हम बोलते है. मन्त्र हमारे मन को नियंत्रण करने में सहायता करते है. अब वैज्ञानिक तौर पर भी यह प्रयोग हो चुके है कि मन्त्र हमारे तनाव को एकदम से कम करने की क्षमता रखते है. इसलिए हम मंत्रो को प्रयोग अपने ध्यान के लिए कर सकते है.

ध्यान कब करना चाहिए? – Meditation Time

धर्म शाश्त्र कहते है कि सुबह सूर्योदय से पहले का समय ध्यान के लिए सबसे उत्तम समय है. यह काफी हद तक सत्य है. सुबह सुबह मन शांत होता है और हम बड़ी आसानी से ध्यान कर पाते है. भारतके मंदिरों के संध्या काल के समय ध्यान और पूजा अर्चना की जाती है. संध्या का समय ध्यान के लिए अति उत्तम माना गया है.

संध्या क्या है?

जब रात और दिन बदल रहे होते है. दिन जब रात में बदल रहा होता है इस समय को हम संध्या कहते है और जब रात दिन में बदल रही होती है इस समय को हम प्रभात कहते है. इस समय को अमृतवेला भी कहा जाता है. इन दोनों कालों में मन कुछ समय के लिए शून्यता में अपने आप चला जाता है. संध्या 3 नाड़ियाँ इड़ा, पिंगला और सुष्म्ना. इड़ा- जबसाँस बायीं नासिका में बह रही होती है. पिंगला- जबसाँस दायीं नासिका में बह रही होती है. सुष्म्नाजबसांसदोनों नासिकाओं के एक सामान बह रही होती है. सुष्म्ना हमारे भीतर का संधिकाल है. हमारे भीतर की संध्या है.जबसुष्म्ना का बहाव हो तो वो हमारे लिए ध्यान का समय होता है.इसलिए जब भी सुष्म्ना चल रही हो तो उस समय केवल और केवल ध्यान करना चाहिए.

कितनी देर ध्यान करना चाहिए? – Meditation In Hindi

मन को टिकाना शुरुआत में बड़ा ही मुश्किल कार्य होता है. बड़ी कौशिश के बाद भी मन टिकता नहीं है. इसलिए शुरुआत थोड़े समय से ही करनी चाहिए. आप चाहे तो केवल 5मिनटसे शुरुआत कर सकते है.इस समय को धीरे धीरे बढ़ाना चाहियें. लेकिन याद रहे 5 मिनट का ध्यान रोज़ाना करना है. क्यूंकिआपका मन आपको यह भी नहीं करने देगा इसलिए नियमित अभ्यास करना जरुरी है चाहेवो केवल 5 मिनट का ही न हो.

 

 

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