तनाव का अर्थ एंव जीवन में तनाव के मुख्य कारण

आधुनिक जीवन के सामाजिक परिवेश में विभिन्न कारणों से व्यक्ति तनाव अनुभव करता है। भागदौड़ से अस्त-व्यस्त जीवन दिन-प्रतिदिन की माँगों से सामंजस्य बैठाने के प्रयास में ऊब और थकान अनुभव करने लगता है। ऐसा लगता है जीवन आनंदपूर्ण और सहज नहीं रह गया है। परिवार, पड़ोस और कार्यक्षेत्र से सम्बंधित कठिनाइयों का निवारण उचित समय पर नहीं हो पाता। फलस्वरूप और अधिक तनाव उत्पन्न हो जाता है।

तनाव का अर्थ?

मनोविज्ञान में तनाव शब्द का उपयोग कारण तथा प्रभाव के संदर्भ में किया जाता है। मानसिक तनाव के कारण के रूप में प्रतिबल तनाव का सम्बंध प्रतिबलक से है अर्थात् वह घटना या कारण जो मानसिक परेशानी उत्पन्न करता है। यह प्रतिबलक शारीरिक, सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक होते हैं। जैसे-थकान, पीड़ा, बीमारी इत्यादि शारीरिक प्रतिबलक हैं। सामाजिक प्रतिबलक के अंतर्गत मानसिक गड़बड़ी के सामाजिक कारकों को लिया जाता है यथा गरीबी, बेरोज़गारी, छुआछूत आदि। मनोवैज्ञानिक प्रतिबलक का अर्थ वे घटनाएँ हैं जो व्यक्ति में मानसिक वैषम्यावस्था उत्पन्न कर देती हैं। जैसे-नौकरी छूट जाना, किसी प्रियजन की मृत्यु, वैवाहिक झगड़े इत्यादि। मानसिक तनाव के प्रभाव के रूप में प्रतिबल दूसरे अर्थ में तनाव का सम्बंध मानसिक स्थिति या मनोविज्ञान से है।

तनाव के मुख्य कारण

1. दैनिक कठिनाइयाँ – a. घरेलू कठिनाइयाँ b. स्वास्थ्य से सम्बंधित कठिनाइयाँ c. समय दबाव की कठिनाइयाँ d. आंतरिक कठिनाइयाँ e. पर्यावरणीय कठिनाइयाँ f. आर्थिक उत्तरदायित्व सम्बंधी कठिनाइयाँ g. व्यावसायिक कठिनाइयाँ h. भविष्य सुरक्षा संबंधी कठिनाइयाँ

2. जीवन परिवर्तन – जीवन में अचानक, अवांछित परिवर्तन भी तनाव का मुख्य कारण है।

3. पीड़ा और कष्ट – शारीरिक क्षति अथवा रोग।

4. कुण्ठा और द्वंद्व – अपनी अथवा परिवार की आवश्यकता पूरी न कर पाने पर कुण्ठा का अनुभव होता है जो कि बाद में तनाव में बदल जाता है। द्वन्द्व भी तनाव उत्पन्न करता है।

5. प्राकृतिक तथा प्रौद्योगिकी जनित महासंकट – यह भी आधुनिक जीवन में तनाव के बड़े कारणों में से एक है। तूफ़ान, बाढ़, विस्फोट, महामारी आदि प्राकृतिक संकट के उदाहरण हैं। जिनका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। इनसे लोग प्रभावित होते हैं और तनाव का शिकार हो जाते हैं। प्रौद्योगिक जनित संकट भी गंभीर तनाव उत्पन्न करते हैं जैसे भोपाल गैस त्रासदी, जयपुर में पेट्रोल डिपो में आग लगना, अणु विस्फोट इत्यादि घटनाओं से आस-पास कई कि.मी. तक लोग तनावग्रस्त हो जाते हैं।

जब व्यक्ति के सामने दो समान शक्ति वाले धनात्मक लक्ष्य होते हैं तब यह तय नहीं कर पाता कि वह किसे पहले प्राप्त करें और किसे बाद में। जैसे पहले भोजन करें या सोने जाएँ। ऐसी दुविधा का निवारण आसान होता है। व्यक्ति पहले भोजन कर ले फिर सोने चला जाए। इस प्रकार का संघर्ष दो प्रकार का होता है। जैसे एक ओर शेर हो और दूसरी ओर गहरी खाई! तो व्यक्ति किसे चुने ? अधिकतर व्यक्ति कोई तीसरा विकल्प चुनने का प्रयास करते हैं। मानसिक संघर्ष में व्यक्ति एक ही समय में धनात्मक और ऋणात्मक लक्ष्यों के बीच पड़ जाता है तथा यह तय करना उसके लिए कठिन हो जाता है कि किसका चुनाव करे। उदाहरण आपको ऐसे व्यक्ति ने रात्रिभोज पर आमंत्रित किया है जिसे आप शत्रु समझते हैं। ऐसे में निमंत्रण ठुकराने से असभ्य कहलाने का भय है, निमंत्रण स्वीकार करने से अहम् को ठेस लगती है। संघषों के स्त्रोत 1. विचिछन्न परिवार 2. माता-पिता की दोषपूर्ण मनोवृत्ति . 3. दोषपूर्ण शिक्षा प्रणाली 4. गलत व्यवसाय नियोजन 5. सामाजिक प्रतिबंध 6. विरोधी सांस्कृतिक मूल्य . 7. इड तथा सुपर ईगो का विरोधी स्वरूप ‘नैराश्य’ अथवा ‘कुण्ठा’ शब्द वास्तव में लैटिन शब्द से बना है, जिसका अर्थ है ‘व्यर्थ’ होता है।

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