Naturopathy for eye disease: नेत्र रोग की प्राकृतिक चिकित्सा और घरेलु उपाय

प्राकृतिक चिकित्सा पूर्णतः भारतीय चिकित्सा पद्धति है। इसमे मिट्टी, पानी, धूप, हवा, आकाश, उपवास, मालिस के द्वारा असाध्य रोगों का ईलाज किया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा स्वस्थ जीवन जीने की कला है। जीवन से निराश रोगियो के लिए प्राकृतिक चिकित्सा एक वरदान है। यदि कोई मनुष्य यह समझ बैठे कि उसका रोग जाऐगा नहीं, तो उसे घबराना नहीं चाहिए। बल्कि उसे एक बार प्राकृतिक चिकित्सा का सहारा लेकर अपने जीवन को सुखी बनाना चाहिए। आँख हमारे शरीर में कुछ खास अंगों में से एक है जिनकी वजह से हम दुनिया से जुड़ पाते है और दुनिया को महसूस करते है। इस चिकित्सा पद्धति में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनो प्रकार का उपचार किया जाता है। प्राकृतिक चिकित्सा की उपयोगिता और इसके लाभ देखकर विदेशों में विद्वानो ने इसे खूब अपनाया। यूनान, अरब, जर्मनी, इंग्लैड, अमेरिका आदि देशो में इसका खूब प्रचार प्रसार भी हुआ।आँख पर मनुष्य का जीवन सर्वाधिक निर्भर रहता है। इस लेख में नेत्र रोग की प्राकृतिक चिकित्सा और घरेलु उपाय(Naturopathy for eye disease) की जानकारी प्रदान की गयी है।

नेत्र रोग की प्राकृतिक चिकित्सा

स्वस्थ आंखे, स्वस्थ शरीर का दर्पण हैं। यदि हम अपने शरीर की स्वच्छता व् स्वास्थ्य का ख्याल रखे, तो आंखे भी निरोगी रहेंगी। आँखों की नित्य साफ पानी से धुलाई नेत्र की ज्योति की रक्षा करती है। आँखों की अच्छी रौशनी के लिए धूम्रपान व् मदिरापान का त्याग कर देना चाहिए। धूप में निकलते समय काले चश्मे प्रयोग सूर्य के हानिकारक विकिरण से नेत्र की सुरक्षा करता है। नियमित रूप से व्यायाम करना सम्पूर्ण शरीर के साथ साथ आँखों को भी बल प्रदान करता है। नेत्र की विशेष व्यायाम प्रक्रिया जिसे योग में “त्राटक” कहा जाता है, उसका अभ्यास नेत्र की ज्योति को बढ़ाता है। यहाँ कुछ उपाय दिए गए हैं, जिनके पालन से आप अपनी आँखों की नियमित देखभाल कर सकते हैं – रात को सोने से पहले आँखों को अच्छे से साफ पानी के छींटे मार कर धोना चाहिए। इससे दिन भर की जमा गन्दगी साफ हो जाती हैं। सुबह उठ कर खाली पेट मुँह में पानी भर कर आँखों पर ताज़े पानी के छींटे मारे। स्नान के बाद पैरो के नख पर तेल से हल्के हल्के मालिश करें। सोते समय पैरों के तलवों पर तेल की मालिश करे। आँखों में यदि काजल या सुरमा लगाते हो तो किसी अन्य के साथ सहभागिता न करे। इससे संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता हैं। धूल, धुंए, तेज प्रकाश से बचें, चश्मे का प्रयोग करें। नंगी आँखों से सूर्य ग्रहण न देखें। बच्चो को खतरनाक नुकीली चीज़ो से दूर रखे। गुल्ली डंडा, धनुष बाण आदि खेलों से नुकसान हो सकता हैं। वेल्डिंग का काम या लकडी का काम होते समय आँखों की सुरक्षा का ध्यान रखे | सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करें। पढाई करते समय उचित प्रकाश की व्यवस्था का ध्यान रखें। किताब से कम से कम डेढ़ फिट की दूरी पर तथा ४५ से ७० डिग्री के कोण पर स्थित होनी चाहिए। कंप्यूटर एवं मोबाइल पर कम से कम समय व्यतीत करना चाहिए। कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम से बचाव के लिए २०-२०-२० नियम का पालन करे। यानी कि हर २० मिनट कंप्यूटर पर काम करने के बाद अपनी नज़रो को स्क्रीन से हटा कर २० फ़ीट की दूरी पर २० सेकंड तक देखना चाहिए। इससे काम करते समय आँखों पर होने वाली थकान दूर होती हैं |

नेत्र रोग घरेलु उपाय

रात में १ बड़ा चम्मच आंवले का चूर्ण या त्रिफला चूर्ण साफ पानी में भिगोकर ढक कर रख दें। सुबह इस पानी को छान कर आँखों को धोने के काम में लाएं | रोज़ १ चम्मच आंवले का चूर्ण खाने से भी लाभ होता हैं। आँखों में गुलाब जल की बुँदे डालना भी लाभदायक हैं। धनिया को कूट कर पानी में उबाल कर छान लें। इस पानी को ठंडा करके एक शीशी में रख लें। रोज़ इसकी २-२ बुँदे आँखों में डालने से फायदा होता हैं। त्रिफला चूर्ण, घी व् मिश्री मिलकर भी खा सकते हैं। सौंफ और मिश्री का चूर्ण भी आँखों को शीतलता प्रदान करता हैं | आयुर्वेद में आँखों की बीमारियों का इलाज औषधियों तथा पंचकर्म के द्वारा होता हैं। नेत्र रोगो में तर्पण, आशच्योतन, अंजन, पुटपाक, विडालक, नस्य आदि विधियों से पंचकर्म किया जाता हैं। औषधियों में आमलकी रसायन, सप्तामृत लौह, महात्रिफला घृत, पाटोलादि घृत आदि लाभकारी औषधियाँ हैं।

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