10 भोज्य पदार्थ जो दर्द निवारक का कार्य करते है – Pain Relief food

कुछ भोज्य पदार्थ दर्द की अनुभूति को कम करने में सहायक हो सकते हैं। हाल ही में हुए शोधों से यह पता चला है कि दो भोज्य पदार्थ दर्द नाशक का काम कर सकते हैं। पहला पदार्थ कैफीन है जिसे इसके सामान्य उपयोग से परे दर्दनाशक दवाओं में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरा पदार्थ कैप्सिसिन। इसे भी परीक्षणों के बाद दर्द नाशक पदार्थ के रूप में मान्यता मिली है।

दर्द कम करनेवाले भोज्य पदार्थ – Pain Relief food

हींग, अजवायन, लौंग, अदरक, मुलैठी, नीम, सरसों के बीज, जायफल, प्याज और अफीम के बीज

1.हींग

यह प्रसिद्ध मसाला है जो दर्द नाशक का काम भी करता है। यह दांत के दर्द को कम करने में विशेष रूप से उपयोगी होता है। हींग को नींबू के रस में घोलकर ज़रा सा गरम करना चाहिए। कपास के टुकड़े को इस घोल भिगोकर दर्द वाले दांत पर रखना चाहिए। यह तुरंत दर्द को खत्म कर देता है।

2.अजवायन

अजवायन में भी दर्द नाशक गुण होते हैं। यह कान के दर्द को कम करने में विशेष रूप से प्रभावी होता है। आधा चम्मच अजवायन को 30 मिली दूध में मिलाकर इतना गरम करना चाहिए कि इसका अर्क दूध में आ जाए। इस दूध को छानकर कान में डालने वाली दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह कान के जकड़न को कम करता है और दर्द मिटाता है। अजवायन से निकला तेल भी गठियां और नसों के दर्द में बहुत लाभ देता है। इसे प्रभावित हिस्से पर मलना चाहिए।

3.लौंग

लौंग भी प्रभावी दर्द नाशक के रूप में काम करती है। दांत के दर्द को कम करने में इसका उपयोग किया जाता है। इसमें उपस्थित एंटिसेप्टिक गुणों के कारण यह दांत में जीवाणुओं के संक्रमण को भी खत्म करती है। सड़े हुए दांत पर लौंग के तेल का फोहा रखने से भी लाभ मिलता है। एक लौंग को एक चम्मच तिल के तेल में साथ गरम किया जाए और इस गरम तेल की चार–पांच बूंदों को कान में डालने से कान का दर्द भी समाप्त हो जाता है। लौंग के तेल की पुल्टिस मांसपेशियों के दर्द में भी राहत देती है। सिर दर्द के लिए लौंग और खड़े नमक का दूध में पेस्ट बनाकर लिया जाना एक जाना–पहचाना घरेलू उपाय है। नमक द्रव को अवशोषित कर लेता है और तनाव को कम करता है।

4.अदरक

अदरक भी एक बढ़िया दर्द नाशक है। यह हर तरह के दर्द को समाप्त कर सकता है। सिर दर्द में सूखे अदरक को पानी के साथ घिसकर बने पेस्ट को माथे पर लगाने से लाभ मिलता है। इसे चेहरे पर लगाने से दांत के दर्द में भी आराम मिलता है। कान का दर्द होने पर अदरक के रस की कुछ बूंदें कान में डालने से राहत मिलती है।

5.मुलैठी

मुलैठी में भी दर्द नाशक गुण होते हैं। इसे मांसपेशियों के दर्द की स्थिति में लाभप्रद पाया गया है। मुलैठी की सूखी हुई जड़ों को रात भर पानी में भिगोकर इसका आसव बनाया जाता है। इस आसव को मांसपेशियों के दर्द से पीड़ित व्यक्ति को दिया जाता है। मुलैठी जोड़ों के दर्द में भी लाभदायक है और इसके उपचार में यह कार्टिसोन के समान काम करती है।

6.नीम

नीम की पत्तियां दर्द नाशक पदार्थ का काम करती हैं। कान के दर्द की स्थिति में नीम की पत्तियों के काढ़े की भाप के सेंक से लाभ मिलता है। इसके लिए मुट्ठी भर नीम की पत्तियों को एक लीटर पानी में उबालना चाहिए और इसकी भाप से कान को सेंकना चाहिए। नीम के पत्तियों के रस को शहद की सामान मात्रा में मिलाकर कान में डालना कान के फोड़े के उपचार में लाभ देता है। इस रस को थोड़ा गरम करना चाहिए और कान में डालना चाहिए। कुछ दिनों तक इसे नियमित रूप से करने पर आराम मिलता है।

7.सरसों के बीज

सरसों भी एक दर्द नाशक पदार्थ है। पानी के साथ इसका पेस्ट या पुल्टिस गठिया, सायटिका, शरीर के अंगों व अन्य मांसपेशियों के दर्द में आराम देता है। इसके उपयोग में यह सावधानी रखनी चाहिए कि यह पुल्टिस सीधे ही शरीर के अंग पर नहीं लगाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से शरीर पर छाले पड़ सकते हैं। इसे लिनेन के कपड़े की पतली तह के ऊपर रखकर बांधना चाहिए।

8.जायफल

जायफल दर्द नाशक पदार्थ के रूप में बड़ा ही उपयोगी है। जायफल को दरदरा पीसकर तिल के तेल में भूरा होने तक भूना जाता है। इसके बाद तेल को ठंडाकर और छानकर प्रभावित क्षेत्र पर लगाया जाता है। जायफल से बना यह तेल गठिया, नसों का दर्द और सायटिका का दर्द समाप्त करने में बड़ा ही लाभदायक होता है।

9.प्याज

प्याज में भी दर्द नाशक गुण होते हैं। यह आंखों के दर्द की स्थिति में भी लाभ देता है। प्याज का रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर एक बोतल में भर लिया जाता है। इसे किसी पतली छड (आई रॉड) की सहायता से आंखों में लगाया जाता है। इससे आंखों के दर्द में तुरंत राहत मिलती है। प्याज बवासीर के दर्द में राहत पाने के लिए भी गुणकारी होता है।  इसके उपचार के लिए दो प्याज गरम राख में डालकर आधे भूनने चाहिए। इसके बाद उनके छिलके निकालकर उनका पेस्ट तैयार करना चाहिए। इस पेस्ट को घी में तलकर एक गोली बनानी चाहिए और इस गोली को फोड़े पर रखकर पट्टी कर देनी चाहिए। ऐसा करने से मरीज़ को तुरंत राहत मिलती है और दर्द कम हो जाता है।

10.अफीम के बीज

अफीम के वे बीज जो डंठल में लगे रहते हैं और जिनका उपयोग अफीम बनाने के लिए नहीं होता, उनमें भी दर्द नाशक गुण पाए जाते हैं। इनका उपयोग भयंकर दर्द जैसे प्रसव के बाद के दर्द, पेट के दर्द और अण्डकोषों दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है। अफीम गठिया, अलग–अलग स्थानों पर हुए फोड़े (ट्यूमर), कैंसर, छाले, कोढ़, सुजाक, लसिका ग्रंथि के टीबी आदि ऐसी बीमारियों जिनमें असहनीय दर्द के चलते मरीज़ को नींद नहीं आती, के लिए उपयोगी है।

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