Skin Problems : इन आयुर्वेदिक नुस्खों से करे विभिन्न चर्मरोगों की चिकित्सा

त्वचा शरीर का सबसे मुख्य हिस्सा होता है। शरीर के अंदरूनी हिस्से की तुलना में स्किन सीधे बाहरी वातावरण के संपर्क में रहती है। जिससे बाहरी वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया आदि सभी त्वचा को प्रभावित करते हैं। ऐसी स्थितियां त्वचा में जलन, दबदबा या सूजन ,लालिमा, सूजन, जलन और खुजली जैसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। पुरानी त्वचा की स्थिति आमतौर पर इलाज योग्य नहीं होती है, लेकिन उन्हें दवाओं का उपयोग करके और जीवन शैली पर पूरा ध्यान देकर प्रबंधित किया जा सकता है। इस लेख में चर्म रोग (Chronic Skin Problems) के घरेलु और आयुर्वेदिक इलाज के बारे में जानकारी प्रदान की गयी है।

चर्म रोग (Chronic Skin Problems) के आयुर्वेदिक इलाज

  • बसंत के दिनों में जब नीम के पेड़ में कोंपलें निकल रही हों तो नीम की 10-12 कोपलें 4-5 काली मिर्च के साथ प्रातः खाली पेट चबाकर खा जाएँ। यह प्रयोग 15-20 दिन करें। आप साल भर के लिए तमाम तरह के चर्मरोगों से छुटकारा पा जाएँगे।
  • 1 ग्राम शुद्ध गंधक को पके हुए एक केले में मिलाकर सुबह-शाम खाएँ। छह माह तक भोजन में नमक खाना बंद कर दें। सफेद दाग पर पलाश या बाकुची का तेल लगाएँ। इस प्रयोग से काफी लाभ मिलेगा।
  • बाकुची, आँवला, हरताल, काली मिर्च बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। हरताल अन्य द्रव्यों से चौथाई ही लें। इन सबको गोमूत्र के साथ खूब पीसकर साँगठी बना लें। सफेद दाग पर पानी में साँगठी घिसकर लगाएँ। दो से तीन हफ्ते में दाग में लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
  • भृंगराज स्वरस के साथ बाकुची आवश्यकतानुसार पीसकर लेप बना लें तथा इसमें किंचित् मात्रा में दही भी मिला लें। यह लेप दिन में 8 बार लगाने पर 3 माह में सफेद दाग समाप्त हो जाता है।
  • सूखी कड़वी तोरई में रात को पानी भरकर रख दें तथा सबेरे खाली पेट पाँच तोला पी लें। इसे नियमित करते रहने से कुष्ठ सहित विभिन्न प्रकार के चर्मरोगों का शमन होता है।
  • महाकुष्ठ (गलित कुष्ठ) सहित विभिन्न प्रकार के समस्त चर्मरोगों के लिए ही चालमोगरा का तेल अति लाभप्रद है। यह तेल 5 से 15 बूँद की मात्रा में घी या मक्खन के साथ भोजन के तुरंत बाद सेवन करना चाहिए। धीरे-धीरे मात्रा 60 बूँद तक बढ़ाई जा सकती है।
  • आरोग्यवर्द्धिनी 250 मि.ग्रा., कैशोर गुग्गुल 500 मि.ग्रा., रसमाणिक्य 250 मि.ग्रा. तथा गंधक रसायन 250 मि.ग्रा. दिन में दो बार मक्खन के साथ दो-तीन माह तक प्रयोग करें। साथ में भोजन के बाद खदिरारिष्ट या महामंजिष्ठादरिष्ट दो चम्मच, इतने ही पानी के साथ लें।

सोरायसिस के आयुर्वेदिक इलाज -Skin Problems

  • चिरायता, नीम के पत्ते, मंजीठ, अमलतास का गूदा, अनंतमूल, गोरखमुंडी तथा उशवा, सभी सौ-सौ ग्राम की मात्रा में लेकर मोटा दरदरा कूटकर रख लें। इसमें से 25 ग्राम की मात्रा 1 लीटर पानी में क्वाथ विधि से तैयार करें। चौथाई जल शेष रहने पर क्वाथ छानकर दिन में 2 या 3 बार नियमित रूप से 3 मास तक सेवन करें।
  • कली चूना 20 ग्राम तथा देशी कपूर 20 ग्राम को पीसकर छान लें और उसमें 75 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर रख लें। इस तेल में कपड़ा या रुई गीली करके दाद, खाज, खुजली, एग्जिमा, मुमफोड़ा आदि रोगों से पीडि़त त्वचा पर प्रतिदिन एक-दो बार लगाएँ तो काफी लाभ होगा। खुजली की स्थिति में पानी में नीम के पत्ते उबालकर ठंडा होने के बाद उस पानी से स्नान करना चाहिए तथा शरीर पर सरसों अथवा नारियल तेल में कपूर मिलाकर मालिश करनी चाहिए। खुजली में आयुर्वेदिक औषधालयों में उपलब्ध मारिच्यादि तेल की मालिश काफी लाभप्रद है।
  • सुहागा, राल, तूतिया, नोनिया गंधक तथा लहसुन बराबर मात्रा में लें। अब लहसुन को अलग रखकर बाकी चारों चीजों का महीन चूर्ण बना लें। अंत में लहसुन पीसकर इस चूर्ण में अच्छी तरह मिलाकर रख लें। इस नुस्खे से दाद, खाज, खुजली जैसे चर्मरोग आसानी से ठीक हो जाते हैं। जब भी इसका प्रयोग करें तो इसे थोड़े से सरसों के तेल में मिलाकर लगाएँ। दाद की बीमारी हो तो पीडि़त स्थान पर बीस दिन नीबू का रस लगाएँ।

घमौरियों का आयुर्वेदिक इलाज – Chronic Skin Problems

  • घमौरियों पर नीबू का रस लगाने से आराम मिल जाता है।200 मि.ली. पानी में 20 ग्राम बढि़या मुनक्का रात में भिगो दें तथा सबेरे उसे मसलकर 4-5 ग्राम त्रिफला के साथ पिएँ। इससे कब्जियत, रक्तविकार, पित्तदोष आदि नष्ट हो जाते हैं तथा त्वचा निर्विकार हो जाती है।
  • वासा (अड़ूसा), एरंड मूल तथा गिलोय के समभाग के क्वाथ में एरंड तेल मिलाकर देने से वातरक्त का विष दूर होता है तथा चर्मरोग मिटते हैं।
  • अरंडी के बीजों की गिरी को पीसकर उसकी पुल्टिस बाँधने से फोड़े-फुंसी में आराम मिलता है।
  • फोड़ा-फुंसी निकल रहे हों तो नीम या अनार के पत्ते पानी में पीसकर लगाने चाहिए। फोड़ा-फुंसी फोड़ना हो तो गेहूँ के आटे में नमक तथा पानी डालकर गरम करके पुल्टिस बाँधें।
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